Yeh Pal
A poem about moments that never stay
यह पल,
दोस्तों से मिलने पर खिंच जाता है,
खुशियाँ देते-देते सिमट जाता है।
दुख के मौसम में ठहरा-सा लगता है,
लेकिन यह पल—पलक झपकते ही बीत जाता है।
बारिश गिरने पर भीग जाता है,
सूरज निकलते ही रोशनी बटोरता है।
चाँदनी रात में सुकून-सा लगता है,
लेकिन तुम्हें भी पता है—
यह पल, पलक झपकते ही बीत जाता है।
डर के दरवाज़े पर लंबा लगता है,
गहरी नींद में सपना लगता है।
हवा के झोंकों में सहमा-सा लगता है,
लेकिन पल तो बस पल का मेहमान है,
यह पल, पलक झपकते ही बीत जाता है।
रोकने से इसे रोक नहीं सकते तुम,
मरज़ी से आता है, मरज़ी से जाता है।
यह तुम्हारी अभिलाषा का मोहताज नहीं,
न ही अधूरी आशा का एहसास है।
यह पल, मेरे दोस्त, पलक झपकते ही बीत जाता है।
जी लो इसे जी भर के,
यह पल बस एक पल का मेहमान है।
न ठहरा है, न ठहरेगा,
पानी की तरह बस बहता जाएगा।
यह पल, पलक झपकते ही बीत जाएगा।

